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मंगलवार, 1 सितंबर 2009

पोकरण-२ का सच क्या हैं?......

पोकरण-२ के सम्बन्ध में अभी हाल में आए एटमी विशेषज्ञ के.संथानम के बयान ने कई सवाल पैदा कर दिए है।

सरकार को इस विषय पर गंभीरता से बिचार करते हुए,सच को जल्द से जल्द देश की जनता के सामाने लाना चाहिए। क्यो की यह मसला देश की सुरक्षा व सरकार के प्रति जनता के विश्वास से जुडा है। मि.संथानम पोकरण-२ परमाणु बम परीक्षण के समन्यवक रह चुके है.यहाँ प्रश्न यह पैदा होता है,की जब संथानम को यह जानकारी थी की परीक्षण पूरी तरह से सफल नही है ,तो उस समय उन्होंने सच क्यो छुपाया? आज उनका यह कहना की देश के पास न्यूक्लियर बम तो है पर फ्यूजन बम नही है,इस कथन के पीछे उनका मकसद क्या है। उनके इस व्यक्तब्य के बाद देश के पूर्व राष्टूपति मान.कलाम का कहना परीक्षण पूरी तरह कामयाब था,नौसेना प्रमुख ने कहा परमाणु क्षमता में शक की गुंजाइश नही, गृह मंत्री ने कहा, दावे का सच मालुम करेगे। प्रधान मंत्री जी ने कहा कुछ वैजानिक ऐसी बातें कर रहे है ,जो गैर जरूरी हैं। बात इतने से ख़त्म होने वाली नही है,सवाल सरकार के प्रति जनता के विश्वास का है। संथानम ने जो कहा अगर वह सच नही है,तो उनके ऊपर देश को गुमराह करने का मामला दर्ज करना चाहिये। दावा सच है, तो सरकार को पोकरण-२ के सभी जिम्मेदार लोगो के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज करना चाहिये। अच्छा तो यह होता सरकार इस संबंध में श्वेत पत्र जारी करे।

विक्रम

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपने बहुत सही बात उठाई है. साकार की यह जबाबदेही है कि वह जनता को वस्तुस्थिति से अवगत कराये

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  2. बेशक! यह ऐसी बात कतई नहीं की सरकार बात को आई-गयी कर दे ..............हम सभी को प्रधानमंत्री कार्यालय .और राष्ट्रपति भवन को बार-बार पत्र लिखते रहना चाहिए .......................आगामी फोलोअप पर नज़र रहेगी ..........

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  3. सरकार की यह जबाबदेही है . वह जनता कोवस्तुस्थिति से अवगत कराये.




    suman

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  4. श्वेत पत्र की मांग जायज है लेकिन सवाल यह है कि यह मांग उठायेगा कौन क्योंकि वे भी दूध के धुले नहीं है । लेकिन जनता को सवाल करने का हक़ है वे उत्तर दें न दें यह उनकी नैतिकता है ।

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